Hindi Story with Love | हिजड़ा
Hindi Story with Love | हिजड़ा
बस
यात्रियों से भर चुकी थी और चलने को तैयार थी| सभी अपना सामान और खुद को
संयत करने में लगे थे| एक युगल अपने लगभग पाँच वर्ष के बच्चे के साथ बैठा
था| उस बच्चे ने हाथ में एक दो रूपये का सिक्का मजबूती से पकडा था|
बच्चे की माँ ने उस बच्चे से वो सिक्का माँगा तो बच्चे ने देने से इनकार कर दिया|
बच्चे की माँ ने झल्लाकर कहा “गिरा देगा तू इसे कहीं”
लेकिन बच्चे ने ध्यान नहीं दिया और जाहिर कर दिया कि वो सिक्का नहीं देगा|
तभी
बस में एक प्रोढ़ उम्र का हिजड़ा चढ़ा| वो चटक लाल रंग का सूट सलवार पहने हुए
था और होठो पर चटक लाली पोती हुई थी| बस में चढ़ते ही उसने ताली पिटते हुए
कुछ नवयुवको की तरफ उत्तेजक इशारे किये और उन्हें छेड़ा|
उन
युवको ने भी एक मादक मुस्कान के साथ उसको 10 का नोट थमा दिया| हिजड़ा अपनी
इन उत्तेजक भाव भंगिमाओ के साथ बस में आगे बढ़ते हुए मांगने लगा|
उस
युगल का चार वर्षीया बच्चा उस हिजड़े को उत्त्सुकता से देख रहा था| बच्चे
के माता-पिता के साथ कई अन्य यात्रियों को भी उस हिजड़े की हरकतों से घृणा
हो रही थी|
बस में कुछ ऐसे यात्री भी थे
जिन्हें वो हिजड़ा मनोरंजन का साधन लग रहा था| ऐसे लोगो के मनोरंजन के लिए
हिजड़ा अपनी हरकतों को और ज्यादा मादक करके कुछ मादक गीतों के बोल भी गा रहा
था|
वो हिजड़ा बस में पीछे कि तरफ बढ़ चूका
था और अभी उसने दो ही लोगो से पैसे लिए थे कि उस चार वर्षीय बच्चे ने जोर
से उस हिजड़े को आवाज़ लगायी “माँ”
हिजड़े ने ध्यान नहीं दिया, बच्चे ने फिर आवाज़ लगायी “माँ”
अबकी बार हिजड़े ने ये शब्द “माँ” सुना तो लेकिन उस तरफ देखा नहीं|
उस बच्चे को उसकी माँ ने रोकने का प्रयास किया लेकिन बच्चे ने पुन: अपनी पूर्ण शक्ति से आवाज दी “ओ ताली बजाने वाली माँ”