माता-पिता के बिना बच्चों की परवरिश और देखभाल उचित तरीके से नहीं हो सकती है। इसी कारण 2 साल 10 माह की इभ्या को भी माता-पिता के स्नेह और प्रेम से वंचित नहीं किया जाए। उसके पिता सुमित और माता अनामिका राठौर की जैन भगवती दीक्षा पर रोक लगाई जाए। यह गुहार लगाई है शहर के इंदिरा नगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कपिल शुक्ला ने। उन्होंने राज्य मानव अधिकार आयोग भोपाल में एक पत्र भेजा है, जिसके जरिए उन्होंने 23 सितंबर को गुजरात के सूरत में होने वाली जैन भगवती दीक्षा पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने इभ्या का हवाला देते हुए सुमित-अनामिका की दीक्षा लेने के निर्णय को गलत ठहराया है। हालांकि राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में फिलहाल कोई टिप्पणी या कार्रवाई नहीं की है। इसकी पुष्टि सामाजिक कार्यकर्ता शुक्ला ने स्वयं की है। परिवार मौन, सोशल मीडिया पर बहस नीमच सिटी के नाहरसिंह राठौर के सुपौत्र सुमित राठौर (35) और उनकी पत्नी अनामिका (34) सूरत में 23 सितंबर को श्री साधुमार्गी जैन आचार्य रामलालजी के सान्निाध्य में जैन भगवती दीक्षा लेंगे। उन्होंने करीब 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति और 2 साल 10 माह की बेटी इभ्या का परित्याग किया है। वर्तमान में दीक्षा के पूर्व उनके निर्णय पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। राठौर परिवार ने चुप्पी साध रखी थी। हालांकि वे उनकी जिद के आगे सामाजिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। इसके उलट सोशल मीडिया पर सुमित-अनामिका की दीक्षा पर जोरदार तरीके से बहस चल रही है। परिवार के दूरस्थ सदस्य, रिश्तेदार व जैन समाज के सदस्यों के अतिरिक्त अजैन भी सोशल मीडिया की बहस में शामिल हैं। कुछ लोग पक्ष में है, वहीं कुछ लोग विरोध में मोर्चा खोले हुए हैं।सूरत श्रीसंघ भी मौन :-सूरत में 23 सितंबर को दीक्षा होना तय माना जा रहा है, लेकिन अनामिका की दीक्षा निरस्त करने की बात भी प्रचारित की जा रही है। रामलालजी के सान्निाध्य में कार्य कर रहे श्री साधुमार्गी जैन श्रीसंघ सूरत ने भी अब इस मामले में चुप्पी साध ली है। श्रीसंघ के महामंत्री सुभाष पगारिया की मानें तो अंतिम निर्णय मसा को करना है। यह स्थिति 23 को ही स्पष्ट होगी।दीक्षा नितांत निजी मामला :-शहर में श्री साधुमार्गी जैन समाज की साध्वी डॉ. प्रतिभा पावनी मंगलवार को आईं। ज्योतिष और वास्तुशास्त्र का अनुभव रखने वाली वाली डॉ. पावनी ने बुधवार को सेमिनार के संबंध में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने सुमित और अनामिका की दीक्षा को बेहद व नितांत निजी मामला बताकर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह निजी मामला है, इसमें किसी को भी प्रतिक्रिया देने का अधिकार नहीं है। सोशल मीडिया पर बहस की जरूरत भी नहीं है।