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वीर दुर्गादास जयंती विशेष !

*वीर दुर्गादास राठौड़ की शौर्य गाथा*
वीर दुर्गादास राठौड़ के सिक्के और पोस्ट स्टाम्प भारत सरकार पहले ही जारी कर चुकी है ।आज इस वीर यौद्धा की जयंती मनाई जा रही है जिसने इस देश का पूर्ण इस्लामीकरण करने की औरंगजेब की साजिश को विफल कर हिन्दू धर्म की रक्षा की थी.....उस महान यौद्धा का नाम है वीर दुर्गादास राठौर...इसी वीर दुर्गादास राठौर के बारे में रामा जाट ने कहा था कि

"धम्मक धम्मक ढोल बाजे दे दे ठोर नगारां की,, जो आसे के घर दुर्गा नहीं होतो,सुन्नत हो जाती सारां की.......

आज भी मारवाड़ के गाँवों में लोग वीर दुर्गादास को याद करते है कि...

“माई ऐहा पूत जण जेहा दुर्गादास, बांध मरुधरा राखियो बिन खंभा आकाश”

हिंदुत्व की रक्षा के लिए उनका स्वयं का कथन
"रुक बल एण हिन्दू धर्म राखियों"
अर्थात हिन्दू धर्म की रक्षा मैंने भाले की नोक से की............
इनके बारे में कहा जाता है कि इन्होने सारी उम्र घोड़े की पीठ पर बैठकर बिता दी। अपनी कूटनीति से इन्होने ओरंगजेब के पुत्र अकबर को अपनी और मिलाकर,राजपूताने और महाराष्ट्र की सभी हिन्दू शक्तियों को जोडकर ओरंगजेब की रातो की नींद छीन ली थी। और हिंदुत्व की रक्षा की थी। उनके बारे में इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने कहा था कि .......... 
"उनको न मुगलों का धन विचलित कर सका और न ही मुगलों की शक्ति उनके दृढ निश्चय को पीछे हटा सकी,बल्कि वो ऐसा वीर था जिसमे राजपूती साहस और कूटनीति मिश्रित थी"............ 
ये निर्विवाद सत्य है कि अगर उस दौर में वीर दुर्गादास राठौर,छत्रपति शिवाजी,वीर गोकुल,गुरु गोविन्द सिंह,बंदा सिंह बहादुर जैसे शूरवीर पैदा नहीं होते तो पुरे मध्य एशिया,ईरान की तरह भारत का पूर्ण इस्लामीकरण हो जाता और हिन्दू धर्म का नामोनिशान ही मिट जाता.............
ऐसे वीर शिरोमणि हिंदुत्व के रक्षक दुर्गादास राठौर की जयंती 13 अगस्त पर उनको शत शत नमन🙏

संकलन-गुलाबचंद्र बारोड,महागढ़
अध्यक्ष~जिला राठौर युवा संगठन नीमच (म.प्र.)

सुचना

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